Tuesday, 15 November 2016

बुद्धि का विकास

हमने बचपन में शेर और खरगोश की कहने पढ़ी थी .उसमें खरगोश अपनी सूझ-बुझ से शेर को कुएँ में कूदने को विवश कर देता है और जंगल के समस्त जानवरों को इस खूंखार शेर के आतंक से मुक्ति दिला देता है .कहानी का conclusion इस प्रकार दिया जाता है -“जिसके पास बुद्धि है ,उसी के पास शक्ति है ,देखा आपने !!!!खरगोश की वजह से दुर्दांत शेर का वध किया गया | ”

मनुष्य और जानवरों के बीच इतना अंतर है की मनुष्य के पास बुद्धि नाम की एक power है जो जानवरों के पास नहीं है और बुद्धि के बल से ही मनुष्य सिंह और हाथी जैसे विशालकाय जानवरों को भी अपने वश में कर लेता है |क्या आप जानते है बुद्धि हमारे लिए कितनी आवश्यक है और इस दुनिया में केवल आधे से ज्यादा लोग ही जानते है | जानिए आखिर क्या मामला है
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बुद्धि एक परम तत्व है ,यह ईश्वर का दिया हुआ अपना साथी है जो हर अच्छे-बुरे समय में आपका साथ देता है | बुद्धि ही ऐसी power है जो इंसान को बुराई में जाने से रोकती है और मन को विकार से दूर रखने के लिए हर इन्द्रियों को अपने नियंत्रण में रखती है |क्या आप जानते है इस दुनिया में ऐसा कोई इंसान नहीं हुआ जो अपनी बुद्धि के विकास के बिना सबके दिल को जीत लिया हो | आखिर ऐसी क्या बात है इस दुनिया में बहुत से ऐसे मनुष्य है जो अपनी बुद्धि को पूरी तरह से प्रयोग नहीं करते | निष्कर्ष पर जाने तो वे अपनी ही बुद्धि को दबा देते है ऐसा तब होता है जब इंसान के भीतर किसी को गालियाँ ,अपमान, शराब ,नशे ,पीटना जैसे काम करने के विचार पनपते है, तब बुद्धि इंसान को इन कुविचारो पर 3 या 6 बार प्रश्न करने विवश करती है,अगर मानो वो मन में सोचे की “अगर मैंने उसका जानबूझ अपमान किया तो मुझे कोई इससे लाभ नहीं मिलेगा “ “अगर मैंने शराब, drug ली तो मेरे स्वास्थ का क्या होगा और फालतू में जिंदगी क्यूँ बर्बाद करू “ ऐसे विचार बुद्धि से सोच समझ कर परखे जाये तो नीच से नीच इंसान भी ऊपर उठ सकता है यानि उसके जीवन में विकास हो रहा है | इसके विपरीत जब वह किसी लालच में पड़ कर शराब, नशे, जुआ जैसे काम करने लगता है तब ऐसी condition में व्याधियां उसके मन घर जमा लेती है | तब ऐसे में उसकी बुद्धि उसके मन में कुविचारो के नीचे दब जाती है और वह ही उसी को नष्ट करता है |ऐसे मनुष्य को महान उपन्यासकार प्रमचंद ने बिना सिंग का पशु बताया है |


“श्रीमदभगवदगीता में बार बार कहा गया है जिसकी बुद्धि भ्रष्ट हो जाती है वह व्यक्ति नष्ट हो जाता है उसके दुःखी होने का प्रश्न नहीं उठता |”


इंग्लैंड के महान नाटककार william shakespeare कहते है की “तुम्हारी बुद्धि तुम्हारा गुरु है, बुद्धि एक ऐसा गुरु है जो प्रत्येक पल हमारा मार्गदर्शन करने के लिए उपस्थित रहता है .इस गुरु का मार्गदर्शन प्राप्त करके हम अपने पुरे competion को निधारित कर सकते है और अपने भावी जीवन की समस्त योजनाये बना सकते है |बुद्धि विवेक के सहारे हम छोटे से छोटा और बड़े से बड़ा निर्णय लेकर सही दिशा में अग्रसर हो सकते है |बुद्धि ही हमको यही बता देगा की हम कौनसी प्रतियोगिता की योग्य है तथा हमको उसमे सफल होने के लिए किस प्रकार की तैयारी करनी चाहिए | “


“में आप से कहता हूँ की अगर आप इसका उपयोग जितनी इमानदारी से करेंगे ,तो आपके जीवन में सफलता की भावना उतनी ही अधिक होगी “

चावल का एक दाना

शोभित एक मेधावी छात्र था। उसने हाई स्कूल और इंटरमीडिएट की परीक्षा में पूरे जिले में टॉप किया था। पर इस सफलता के बावजूद उसके माता-पिता उसे खुश नहीं थे। कारण था पढाई को लेकर उसका घमंड ओर अपने बड़ों से तमीज से बात न करना। वह अक्सर ही लोगों से ऊंची आवाज़ मे बात किया करता और अकारण ही उनका मजाक उड़ा देता। खैर दिन बीतते गए और देखते-देखते शोभित स्नातक भी हो गया।

स्नातक होने के बाद सोभित नौकरी की खोज में निकला| प्रतियोगी परीक्षा पास करने के बावजूद उसका इंटरव्यू में चयन नहीं हो पाता था| शोभित को लगा था कि अच्छे अंक के दम पर उसे आसानी से नौकरी मिल जायेगी पर ऐसा हो न सका| काफी प्रयास के बाद भी वो सफल ना हो सका| हर बार उसका घमंड, बात करने का तरीका इंटरव्यू लेने वाले को अखर जाता और वो उसे ना लेते| निरंतर मिल रही असफलता से शोभित हताश हो चुका था , पर अभी भी उसे समझ नहीं आ रहा था कि उसे अपना व्यवहार बदलने की आवश्यता है।

एक दिन रस्ते में शोभित की मुलाकात अपने स्कूल के प्रिय अध्यापक से हो गयी| वह उन्हें बहुत मानता था ओर अध्यापक भी उससे बहुत स्नेह करते थे | सोभित ने अध्यापक को सारी बात बताई| चूँकि अध्यापक सोभित के वयवहार से परिचित थे, तो उन्होने कहा की कल तुम मेरे घर आना तब मैं तुम्हे इसका उपाय बताऊंगा|

शोभित अगले दिन मास्टर साहब के घर गया| मास्टर साहब घर पर चावल पका रहे थे| दोनों आपस में बात ही कर रहे थे की मास्टर साहब ने शोभित से कहा जाके देख के आओ की चावल पके की नहीं| शोभित अन्दर गया उसने अन्दर से ही कहा की सर चावल पक गए हैं, मैं गैस बंद कर देता हूँ| मास्टर साहब ने भी ऐसा ही करने को कहा|

अब सोभित और मास्टर साहब आमने सामने बैठे थे| मास्टर साहब शोभित की तरफ मुस्कुराते हर बोले –शोभित तुमने कैसे पता लगया की चावल पक गए हैं?

शोभित बोला ये तो बहुत आसान था| मैंने चावल का एक दाना उठाया और उसे चेक किया कि वो पका है कि नहीं ,वो पक चुका था तो मतलब चावल पक चुके हैं|

मास्टर जी गंभीर होते हुए बोले यही तुम्हारे असफल होने का कारण है|

शोभित उत्सुकता वश मास्टर जी की और देखने लगा|

मास्टर साहब समझाते हुए बोले की एक चावल के दाने ने पूरे चावल का हाल बयां कर दिया| सिर्फ एक चावल का दाना काफी है ये बताने को की अन्य चावल पके या नहीं| हो सकता है कुछ चावल न पके हों पर तुम उन्हें नहीं खोज सकते वो तो सिर्फ खाते वक्त ही अपना स्वाभाव बताएँगे|



इसी प्रकार मनुष्य कई गुणों से बना होता है, पढाई-लिखाई में अच्छा होना उन्ही गुणोँ में से एक है , पर इसके आलावा, अच्छा व्यवहार, बड़ों के प्रति सम्मान , छोटों की प्रति प्रेम , सकारात्मक दृष्टिकोण , ये भी मनुष्य के आवश्यक गुण हैं, और सिर्फ पढाई-लिखाई में अच्छा होना से कहीं ज्यादा ज़रुरी हैं।

तुमने अपना एक गुण तो पका लिया पर बाकियो की तऱफ ध्यान ही नहीं दिया। इसीलिए जब कोई इंटरव्यूवर तुम्हारा इंटरव्यू लेता है तो तुम उसे कहीं से पके और कहीं से कच्चे लगते हो , और अधपके चावलों की तरह ही कोई इस तरह के कैंडिडेट्स भी  पसंद नही करता।

शोभित को अपनी गलती का अहसास हो चुका था| वो अब मास्टर जी के यहाँ से नयी एनर्जी ले के जा रहा था|

तो दोस्तों हमारे जीवन में भी कोई न कोई बुराई होती है, जो हो सकता है हमें खुद नज़र न आती हो पर सामने वाला बुराई तुरंत भाप लेता है| अतः हमें निरंतर यह प्रयास करना चाहिए कि हमारे गुणों से बना चावल का एक-एक दाना अच्छी तरह से पका हो, ताकि कोई हमें कहीं से चखे उसे हमारे अन्दर पका हुआ दाना ही मिले।

मौत का सौदागर

1888 की बात है, एक व्यक्ति सुबह-सुबह उठ कर अखबार पढ़ रहा था , तभी अचानक उसकी नज़र एक “शोक – सन्देश ” पर पड़ी। वह उसे देख दंग रह गया , क्योंकि वहां मरने वाले की जगह उसी का नाम लिखा हुआ था। खुद का नाम पढ़कर वह आश्चर्यचकित तथा भयभीत हो गया। उसे यकीन नहीं हो रहा था कि अखबार ने उसके भाई लुडविग की मरने की खबर देने की जगह खुस उसके मरने की खबर प्रकाशित कर दी थी। खैर , उसने किसी तरह खुद को समभाला, और सोचा , चलो देखते हैं की लोगों ने उसकी मौत पर क्या प्रतिक्रियाएं दी हैं।

उसने पढ़ना शुरू किया, वहां फ्रेंच में लिखा था , “”Le marchand de la mort est mort”यानि , “मौत का सौदागर” मर चुका है”

यह उसके लिए और बड़ा आघात था , उसने मन ही मन सोचा , ” क्या उसके मरने के बाद लोग उसे इसी तरह याद करेंगे ?”

यह दिन उसकी ज़िन्दगी का टर्निंग पॉइंट बन गया, और उसी दिन से डायनामाइट का यह अविष्कारक विश्व शांति और समाज कल्याण के लिए काम करने लगा। और मरने से पहले उसने अपनी अकूत संपत्ति उन लोगों को पुरस्कार देने के लिए दान दे दी जो विज्ञान और समाज कलायन के क्षत्र में उत्कृष्ट काम करते हैं।

मित्रों , उस महान व्यक्ति का नाम था , ऐल्फ्रेड बर्नार्ड नोबेल , और आज उन्ही के नाम पर हर वर्ष “नोबेल प्राइज ” दिए जाते हैं। आज कोई उन्हें “मौत के सौदागर के रूप” में नहीं याद करता बल्कि हम उन्हें एक महान वैज्ञानिक और समाज सेवी के रूप में याद किया जाता है।

जीवन एक क्षण भी हमारे मूल्यों और जीवन की दिशा को बदल सकता है , ये हमें सोचना है की हम यहाँ क्या करना चाहते हैं ? हम किस तरह याद किये जाना चाहते हैं ? और हम आज क्या करते हैं यही निश्चित करेगा की कल हमें लोग कैसे याद करेंगे ! इसलिए , हम जो भी करें सोच-समझ कर करें , कहीं अनजाने में हम “मौत के सौदागर” जैसी यादें ना छोड़ जाएं !!!

Saturday, 12 November 2016

भारत में विमुद्रीकरण का प्रभाव

 केन्द्र सरकार द्वारा कालाधन पर अंकुश लगाने के उद्देश्य से पांच सौ व एक हजार रूपये के नोट को बंद कर दिये जाने का देश  में जबरदस्त असर देखने को मिल रहा है, नोटो के बंद हो जाने से हर प्रकार का व्यवसाय प्रभावित हुआ है  जिन दुकानों पर दिनभर ग्राहको की लाइन लगी रहती थी वहीं वही दुकानदार ग्राहको के इंतजार में बैठे देखे गये आम जनता को काफी दिक्कतों का समना करना पड़ रहा है कुछ लोग इस फैसले की निंदा कर रहे है तो कुछ लोग इसे सराहनीय भी बता रहे हैं जाहिर सी बात है देश में बहुत बड़ा तबका मध्यम वर्गीय है देश में बहुत बड़े पैमाने पर मिडल क्लास के लोग रह रहें है जिन्हें काफी मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है किसी के पास पैसे हैं किसी के पास नही हैं तो किसी के पास सिर्फ 500 ही हैं ऐसे में परेशान लोग इस फैसले के प्रति रोष प्रकट कर रहें हैं, हालाँकि सबसे बड़ा फायदा भी इन्ही मध्यम वर्गीय के लोगों को होने वाला है दोस्तों आप से बताना चाहूंगा की सरकार को सभी की फिक्र है  सरकार जो भी क़दम उठाती है जनता के हित में उठाती है देश के हित में उठाती है और जिन लोगों को अभी ये बुरा लग रहा है सबसे ज्यादा फायदा उन्हे ही होने वाला है काला धन नष्ट होने के साथ ही देश की GDP बढेगी जिसका फायदा सीधा आम आदमी को होगा मिडल क्लास लोगों को होगा GDP बढ़ने से महँगाई कम होगी जिससे गरीब इंसान कम पैसों में अपना परिवार चला पायेगा और बचा भी पायेगा मकानों की कीमत में गिरावट आयेगी जो ईमानदार व्यक्ति, मेहनत से कमाने वाले लोगों के लिये अच्छी ख़बर है सेविंग पर हेड 2.5 लाख किया गया है जिससे छोटे व्यापारियों  को बहुत बड़ा फायदा होने वाला है..
 मित्रों  आपसे कहना चाहूंगा बस कुछ ही दिनो की बात है आज आप जो परेशानियां झेल रहें है उससे भविष्य में आप ही का फायदा होने वाला है मै चाहूंगा आप लोग सरकार के इस फैसले का सम्मान करे और देश की मजबूत अर्थमेंव्यवस्था बनाने एक जिम्मेदार नागरिक की अपनी भूमिका अदा करें.. 
धन्यवाद !
आपका दोस्त
सौरभ कुमार सोनी 

Wednesday, 2 November 2016

अहंकार छोड़िये सीखना शुरू करिये

धरती पर जन्म लेने के साथ ही सीखने की प्रक्रिया प्रारंभ हो जाती है ज्यों हम बड़े होते जाते हैं, सीखने की प्रक्रिया भी विस्तार लेती जाती है, जल्द ही हम उठना, बैठना, बोलना, चलना सीख लेते हैं। इस बड़े होने की प्रक्रिया के साथ ही कभी-कभी हमारा अहंकार हमसे अधिक बड़ा हो जाता है और तब हम सीखना छोड़कर गलतियां करने लगते हैं। यह अंहकार हमारे विकास मार्ग को अवरूद्ध कर देता है इस बात की चर्चा करते हुए मुझे एक वाकिया याद आ रहा है जिसकी चर्चा यहाँ करना अच्छा होगा।

एक बार की बात है रूस के ऑस्पेंस्की नाम के महान विचारक एक बार संत गुरजियफ से मिलने उनके घर गए। दोनों में विभिन्न् विषयों पर चर्चा होने लगी। ऑस्पेंस्की ने संत गुरजियफ से कहा, यूं तो मैंने गहन अध्ययन और अनुभव के द्वारा काफी ज्ञान अर्जित किया है, किन्तु मैं कुछ और भी जानना चाहता हूं। आप मेरी कुछ मदद कर सकते हैं? गुरजियफ को मालूम था कि ऑस्पेंस्की अपने विषय के प्रकांड विद्वान हैं, जिसका उन्हें थोड़ा घमंड भी है अतः सीधी बात करने से कोई काम नहीं बनेगा। इसलिए उन्होंने कुछ देर सोचने के बाद एक कोरा कागज उठाया और उसे ऑस्पेंस्की की ओर बढ़ाते हुए बोले- ''यह अच्छी बात है कि तुम कुछ सीखना चाहते हो। लेकिन मैं कैसे समझूं कि तुमने अब तक क्या-क्या सीख लिया है और क्या-क्या नहीं सीखा है। अतः तुम ऐसा करो कि जो कुछ भी जानते हो और जो नहीं जानते हो, उन दोनों के बारे में इस कागज पर लिख दो। जो तुम पहले से ही जानते हो उसके बारे में तो चर्चा करना व्यर्थ है और जो तुम नहीं जानते, उस पर ही चर्चा करना ठीक रहेगा।''


बात एकदम सरल थी, लेकिन ऑस्पेंस्की के लिए कुछ मुश्किल। उनका ज्ञानी होने का अभिमान धूल-धूसरित हो गया। ऑस्पेंस्की आत्मा और परमात्मा जैसे विषय के बारे में तो बहुत जानते थे, लेकिन तत्व-स्वरूप और भेद-अभेद के बारे में उन्होंने सोचा तक नहीं था। गुरजियफ की बात सुनकर वे सोच में पड़ गए। काफी देर सोचने के बाद भी जब उन्हें कुछ समझ में नहीं आया तो उन्होंने वह कोरा कागज ज्यों का त्यों गुरजियफ को थमा दिया और बोले- श्रीमान मैं तो कुछ भी नहीं जानता। आज आपने मेरी आंखे खोल दीं। ऑस्पेंस्की के विनम्रतापूर्वक कहे गए इन शब्दों से गुरजियफ बेहद प्रभावति हुए और बोले -

''ठीक है, अब तुमने जानने योग्य पहली बात जान ली है कि तुम कुछ नहीं जानते। यही ज्ञान की प्रथम सीढ़ी है। अब तुम्हें कुछ सिखाया और बताया जा सकता है। अर्थात खाली बर्तन को भरा जा सकता है, किन्तु अहंकार से भरे बर्तन में बूंदभर ज्ञान भरना संभव नहीं। अगर हम खुद को ज्ञान को ग्रहण करने के लिए तैयार रखें तो ज्ञानार्जन के लिये सुपात्र बन सकेंगे। ज्ञानी बनने के लिए जरूरी है कि मनुष्य ज्ञान को पा लेने का संकल्प ले और वह केवल एक गुरू से ही स्वयं को न बांधे बल्कि उसे जहां कहीं भी अच्छी बात पता चले, उसे ग्रहण करें।''

अच्छे विचार : प्रेरणादायक कहानियाँ

अच्छे विचार : प्रेरणादायक कहानियाँ: 1. क्या आपको पता है, जब हाथी का बच्चा छोटा होता है तो उसे पतली एंव कमजोर रस्सी से बांधा जाता है| हाथी का बच्चा छोटा एंव कमजोर होने के कारण ...

Tuesday, 1 November 2016

प्रेरणादायक कहानियाँ

1. क्या आपको पता है, जब हाथी का बच्चा छोटा होता है तो उसे पतली एंव कमजोर रस्सी से बांधा जाता है| हाथी का बच्चा छोटा एंव कमजोर होने के कारण उस रस्सी को तोड़कर भाग नहीं सकता| लेकिन जब वही हाथी का बच्चा बड़ा और शक्तिशाली हो जाता है तो भी उसे पतली एंव कमजोर रस्सी से ही बाँधा जाता है, जिसे वह आसानी से तोड़ सकता है लेकिन वह उस रस्सी को तोड़ता नहीं है और बंधा रहता है| ऐसा क्यों होता है?
ऐसा इसलिए होता है क्योंकि जब हाथी का बच्चा छोटा होता है तो वह बार-बार रस्सी को छुड़ाकर भागने की कोशिश करता है, लेकिन वह कमजोर होने के कारण उस पतली रस्सी को तोड़ नहीं सकता और आखिरकर यह मान लेता है कि वह कभी भी उस रस्सी को तोड़ नहीं सकता| हाथी का बच्चा बड़ा हो जाने पर भी यही समझता है कि वह उस रस्सी को तोड़ नहीं सकता और वह कोशिश ही नहीं करता| इस प्रकार वह अपनी गलत मान्यता अथवा गलत धारणा (Wrong Beliefs) के कारण एक छोटी सी रस्सी से बंधा रहता है जबकि वह दुनिया के सबसे ताकतवर जानवरों में से एक है|
2. दोस्तों वैज्ञानिकों के अनुसार भौंरे का शरीर बहुत भारी होता है| इसलिए विज्ञान के नियमो के अनुसार वह उड़ नहीं सकता| लेकिन भौंरे को इस बात का पता नहीं होता एंव वह यह मानता है की वह उड़ सकता है| इसलिए वह लगातार कोशिश करता जाता है और बार-बार असफल होने पर भी वह हार नहीं मानता क्योंकि वह यही सोचता है कि वह उड़ सकता है| आखिरकार भौंरा उड़ने में सफल हो ही जाता है|

3. दोस्तों इस जीवन में नामुनकिन कुछ भी नहीं (Nothing is impossible in life), नामुनकिन शब्द मनुष्य ने ही बनाया है| जब टेलीफोन और रेडियो आदि का आविष्कार नहीं हुआ था तो दुनिया और विज्ञान यही मानते थे कि आवाज को कुछ ही समय में सैकड़ो किलोमीटर दूर पहुँचाना नामुनकिन (Impossible) है, लेकिन आज मोबाइल हमारे जीवन का हिस्सा है| इसी तरह जब तक विमान का आविष्कार नहीं हुआ था तब तक विज्ञान जगत भी यही मानता था कि मनुष्य के लिए आकाश में उड़ना संभव नहीं लेकिन जब राइट बंधुओं ने विमान का आविष्कार किया तो यह “असंभव”, “संभव” में बदल गया

4. इसी तरह क्रिकेट की बात ले लीजिये – वनडे क्रिकेट के इतने बड़े इतिहास में वर्ष 2010 तक एक भी दोहरा शतक नहीं लगा लेकिन वर्ष 2010 में सचिन तेंदुलकर के दोहरा शतक लगाने के 4-5 वर्षों में ही 7 और दोहरे शतक (Double Centuries) लग गए| क्या यह मात्र संयोग था? ऐसा क्यों हुआ? ऐसा इसीलिए हुआ क्योंकि 2010 से पहले जब किसी ने दोहरा शतक नहीं लगाया था तो सभी की मानसिकता यही थी कि दोहरा शतक लगाना बहुत ही मुश्किल है| क्योंकि अभी तक इस रिकॉर्ड को किसी ने नहीं तोडा था तो यह नामुनकिन सा लगता था| लेकिन जब सचिन ने दोहरा शतक लगाया तो सभी की मानसिकता बदल गयी और यह लगने लगा कि दोहरा शतक लगाना मुश्किल है पर नामुनकिन नहीं|

यह हम पर निर्भर करता है कि हमें हाथी की तरह अपनी ही सोच का गुलाम रहना है या भौरे की तरह स्वतंत्र| अगर हम मानते है और स्वंय पर यह विश्वास करते है कि हम कुछ भी कर सकते है तो हमारे लिए नामुनकिन कुछ भी नही